क्रिसमस नाइट का खौफनाक रहस्य

क्रिसमस नाइट का खौफनाक रहस्य

नई शुरुआत का अंधेरा

सेक्टर 56 , नोएडा की एक पुरानी बिल्डिंग का नौवीं मंजिल का फ्लैट।

फ्लैट पुराने डिजाइन का है ऑफ व्हाइट कलर की दीवारें जो कि अब पीली पड़ चुकी है। बड़ी-बड़ी खिड़कियां जिससे पूरा नोएडा का शहर दिख रहा है लेकिन फ्लैट शहर से कुछ दूरी पर एक सूनसान सड़क के किनारे है।

तनवी : तनवी एक 26 साल की लड़की देखने में सुंदर, 5 फुट 6 इंच कद और काम करते समय चश्मा पहनने वाली जिसकी शादी आरव से हुई है।
आरव 29 साल का लड़का जो देखने में दुबला पतला और लंबा है । जो सॉफ्टवेयर इंजीनियर का काम करता है।

अभी उनकी शादी को 3 महीने हुए थे काम की वजह से उन्हें अपना गांव छोड़कर नोएडा आना पड़ा था।

उनको इस फ्लैट में नौवीं मंजिल का कमरा मिला था। दो कमरों के साथ एक रसोई और एक बाथरूम भी था । अंदर से दिखने में कमरा पुराने जैसा था लेकिन उन कमरों में पेंट नया हुआ था।

तन्वी के चेहरे पर नए घर की खुशी और थकान दोनों झलक रही है। वह घर के सामान को बाक्स से निकाल कर कमरों में जोड़ रही है और उसका पति सोफे पर बैठा अपना लैपटॉप चला रहा है। उसकी उंगलियां कीबोर्ड पर तेजी से चल रही है। उसका चेहरा स्क्रीन की रोशनी में नीला पड़ गया है।

दादाजी का वो खास दिया

तन्वी, बाक्स से रुई में लिपटी एक चीज निकलते हुए , मुस्कुरा कर कहती है । आरव देखो जरा … मिल गया , दादाजी का वो खास दिया।

वह एक भारी- भरकम, मिट्टी का दिया निकलती है। उस पर हाथ से उकेरी गई नक्काशी मिट सी गई है। लेकिन उसकी बनावट में एक अजीब सी खूबसूरती है।

आरव बिना रुचि लिए कहता है यह सब पुराना सामान यहां क्यों लाना ? नए एलइडी (LED) लाइट लगा लेते हैं, ज्यादा सेफ और ज्यादा ब्राइट है।

तन्वी: (निराश होकर दिए को अपने हाथों में लिए) तुम्हें कुछ भी फील नहीं होता क्या?

यह हमारी पहली क्रिसमस है अपने इस घर में । हमें यहां अपनी पहली दिवाली में आना था लेकिन आ नहीं पाए।
2 दिन बाद क्रिसमस है और मैं कोई झगड़ा नहीं चाहती…

दादाजी कहां करते थे, इस दिए कि लो में हमारे पूर्वजों की आवाज बस्ती है यह घर को सकारात्मक ऊर्जा से भर देती है।

आरव (थोड़ा चिल्लाकर लैपटॉप बंद करते हुए)
ऊर्जा की नहीं, इस बार मेरी प्रोजेक्ट की चिंता करो।
चलो, जल्दी से लगा दो यह दिया और खाना खा लेते हैं।

दिए का इशारा

तन्वी, एक माचिस निकालती है और दिए की बत्ती जलाती है।
दिया जलते ही, उसकी लो सामान्य नहीं रहती । वह एक पाल के लिए हरे रंग की होकर जलती है, फिर पीली हो जाती है।

अचानक लाइट चली जाती है।

लेकिन सबसे डरावनी बात यह है कि बंद खिड़कियों के बावजूद, वह लो तेजी से कांपने लगती है । ऐसे – जैसे कोई जोर-जोर से सांस ले रहा हो। टिमटिमाती लो से कमरे में अजीब सी छायाएं नाचने लगती है।

तन्वी : (आवाज में डर के साथ) आरव… यह देखो तो सही ।इस दिए को… इसकी लो…

आरव, उठकर आता है और झुक कर दिए को देखता है। उस पल लो स्थिर हो जाती है। लेकिन दोनों बिना पलके झुकाए दिए को देख रहे होते हैं। तभी आरव फूंक मार कर दिया बंद कर देता है और भूत की आवाजें निकालने लगता है और तनवी को डराने लगता है। अंधेरे की वजह से तन्वी डर जाती है।

तभी फिर अचानक लाइट आती है।

आरव कहता है लो लाइट भी आ गई चलो, खाना खाते हैं ।वह चला जाता है, तन्वी अकेली दिए को देखते रह जाती है , दिए से अब भी धूंआ निकल रहा होता है उसके मन में एक अजीब सा ख्याल आता है।
तभी आरव उसे आवाज लगता है । तन्वी भी खाना खाने चली जाती है। खाना खाने के बाद वह अपने कमरे में सोने चले जाते हैं।

रात का सन्नाटा

रात के 2:00 बजे हैं। तन्वी की नींद टूट गई है। उसकी नजर कमरे के कोने में रखें उसे दिए पर पड़ी, जो अब बुझ चुका है। तभी उसकी नजर दीवार पर पड़ती है।

दिए के स्टैंड से, टिमटिमाती स्ट्रीट लाइट की रोशनी में, एक लंबी, पतली, उंगली जैसी छाया दीवार पर बन रही है। यह छाया कोने में रखी एक पुरानी, लोहे की अलमारी की तरफ इशारा कर रही है। वह अलमारी इस फ्लैट में पहले से ही थी और उस पर एक जंग लगा ताला लटका हुआ है।

तन्वी (कांपती की आवाज में, खुद से फुसफुसाते हुए )
नहीं …… यह नहीं हो सकता। मैं सपना देख रही हूं। आरव सही कहता है , मैं बहुत ज्यादा इमेजिन करने लगी हूं।
वह करवट बदलकर सोने की कोशिश करती है। लेकिन उसकी आंखें उस अलमारी पर टिकी रहती हैं । उसे लगता है, जैसे अलमारी के अंदर से कोई हल्की सी खरोच की आवाज आ रही है । जैसे कोई अंदर हो।

सच्चाई का दरवाजा खुलता है

अगली सुबह आरव ऑफिस चला गया है। तन्वी का दिमाग पूरी रात के उस अनुभव से घिरा हुआ है । एक अजीब जिज्ञासा उसे – उस अलमारी की तरफ खींच रही है । वह सोच रही है क्या सच में कोई अलमारी के अंदर है।

वह टूलबॉक्स से एक हमर लेती है और बिना एक पल गंवाए, अलमारी के जंग लगे ताले पर जोर से वार करती है। दो – तीन वारो के बाद ताला टूट कर जमीन पर गिर जाता है। वह अलमारी का दरवाजा खोलती है। दरवाजा खोलते ही धूल उड़ने लगती है और अंदर से सड़न की गंध आती है।

तन्वी अलमारी चेक कर रही होती है और उसे एक पुरानी डायरी मिलती है । डायरी भुरे रंग की होती है जब वह उसे खोलती है। तो वह देखी है….
कि उसके अंदर कुछ लिखा हुआ है।
वह पढ़ने लगती है।

यह घर मेरा है। तुम यहां अजनबी हो। तुम्हें चले जाना चाहिए, नहीं तो वही होगा जो मेरे साथ हुआ।

तन्वी डर जाती है । उसका दिल जोरो से धड़कने लगता है। वह अलमारी की तरफ देखती है। उसे लगता है जैसे, कोई उसे देख रहा हो ।
तनवी डायरी लेकर सोफे पर बैठ जाती है। डायरी के पन्ने पीले और भुरभरे हो चुके हैं। अगला पन्ना पलटते ही उसकी सांसे रुक सी जाती है।
तन्वी पढ़ना शुरू करती है। उसकी आवाज भारी और डरी हुई है।

डायरी का काला सच

मेरा नाम नीतू है । आज की तारीख है, 24 दिसंबर 1985, कल क्रिसमस है और मैं बहुत डरी हुई हूं।

मेरे पति विशाल का व्यवहार पिछले कुछ महीनो से बहुत बदल गया है । वह हमेशा उस पुरानी आलमारी में कुछ छुपाता निकलता रहता है । जब मैंने वो अलमारी चेक की तब मुझे एक कागज मिला। जब मैंने उसे खोला तो उस पर लिखा था । ‘तुम मर चुकी हो’

यह सब देखकर मैं घबरा गई । जब मैंने विशाल से पूछा यह क्या है । तो उसने मुझे धमकी दी कि अगर मैंने किसी से कुछ कहा, तो…..

तन्वी जल्दी-जल्दी पन्ने पलटती है। अचानक पन्नों पर कुछ अपने आप लिखना शुरू हो जाता है।
तन्वी और भी डर जाती है।

25 दिसंबर क्रिसमस की रात …..
वह रात….
उसने मुझे…..
इसी बेडरूम में….
उस पुरानी अलमारी के सामने….
उसने मेरा गला घोट दिया….
मैं सांस नहीं ले पा रही….
बचाओ बचाओ बचाओ ।

वह मेरी लाश को…
उसी अलमारी में छुपा रहा है…
उसने मुझे आग लगा दी…
कोई मदद करो…
बचाओ बचाओ बचाओ ।

भयानक शॉप

तन्वी की आंखों में आंसू आ जाते हैं । वह अब ओर भी डरी हुई है । वह डायरी बंद कर देती है। वह गहरी सोच में डूब जाती है। वो सोचती है, इस सब का आरव से क्या कनेक्शन है । उसका बर्ताव क्यों बदल गया है । कहीं इस घर में भूत तो नहीं।

तन्वी – अरव के पर्सनल डॉक्यूमेंट चेक करने लगती है ।
जो कि उसके लैपटॉप बैग में रखे हुए थे। वह देखती है कि आरव के दादाजी का नाम विशाल है । ओ नहीं, आरव – विशाल का पोता है।

तन्वी का दिल धड़कना बंद सा हो गया । वह धीरे-धीरे पलटती है।

आरव दरवाजे पर खड़ा है। वह अभी-अभी घर आया है । लेकिन उसके चेहरे पर एक अलग सी मुस्कान है । उसकी आंखों में कोई जान नहीं है । जैसे कोई ओर ही उसके शरीर में घुस गया हो।

आरव: क्या पढ़ रही थी तन्वी? कोई… अच्छी… कहानी है क्या?

तन्वी की सांस थम सी गई। वह आरव की आंखों में देख रही थी और वहां उसे वह आदमी नहीं दिख रहा था जिससे उसने शादी की थी।

तन्वी: आरव यह क्या है? यह डायरी… नीतू…

आरव (धीरे-धीरे आ गई बढ़ाते हुए) दादाजी ने बहुत कोशिश की थी इस राज को दफनाने की, उन्होंने पुलिस को बताया कि नीतू अपने मायके चली गई है उन्होंने इस फ्लैट को बेच दिया और दिल्ली चले गए लेकिन उन्होंने मुझे यह कहानी बताई… इस शॉप के बारे में बताया ।

तन्वी: श्रॉफ? कैसा श्रॉफ?

आरव: (अब वह बिल्कुल उसके सामने खड़ा है, उसकी आंखें अब पूरी तरह काली लग रही है)
शॉप यह है कि इस घर में रहने वाला हर परिवार का पुरुष… अपनी पहली पत्नी को खो देगा। दादाजी ने ऐसा किया। पापा ने भी अपनी पहली पत्नी को खोया एक दुर्घटना में और अब मेरी बारी है।

तन्वी की आंखों में आंसू आ गए। वह समझ गई। यह कोई दुर्घटना नहीं थी। यह एक पारिवारिक परंपरा थी। एक शापित परंपरा ।
तन्वी : तुम मुझे मार डालोगे ? सिर्फ इसलिए क्योंकि तुम्हारे दादाजी ने एक हत्या की थी?

आरव: तनवी को पकड़ते हुए, इसे पारिवारिक धरोहर समझो, तन्वी । और चिंता मत करो… मैं तुम्हारी यादों को संभालकर रखूंगा।
तन्वी चीखने की कोशिश करती है, लेकिन आवाज गले में ही अटक जाती है।

तभी, अचानक एक घटना होती है।

भयानक अंत

टेबल पर रखा वह पुराना मिट्टी का दिया, बिना किसी के छुए, अपने आप जल उठता है ।
इस बार उसकी लौ सीधी और तेज नहीं थी। वह एक विशाल मानवाकार छाया में बदल गई जो दीवार पर फैल गई। यह एक औरत की छाया थी, जिसके गले पर निशान थे। छाया ने अपना एक हाथ बढ़ाया सीधे आरव की तरफ ।
आरव की मुस्कान गायब हो गई उसके चेहरे पर असली डर दिखाई देने लगा।

आरव चीखते हुए, नहीं! तुम… तुम यहां नहीं हो। तुम मर चुकी हो।

छाया ने कोई आवाज नहीं निकली, लेकिन आरव जोर से चीखा, जैसे उसका गला घोंटा जा रहा हो। वह हवा में तड़पने लगा। उसके पैर जमीन से उठ गए।
तन्वी हैरानी से यह सब देख रही थी । दिए कि लौ तेजी से कांप रही थी और उसकी छाया आरव को उसी पुरानी अलमारी की तरफ खींच रही थी। अलमारी का दरवाजा अपने आप जोर से खुल गया और अंदर सिर्फ गहरा अंधेरा था।
एक चीज के साथ, आरव को उस अंधेरे में खींच लिया गया। अलमारी का दरवाजा जोर से बंद हो गया ।

सन्नाटा छा गया।

दिए की लौ शांत हो गई।

तन्वी जमीन पर बैठकर फूट-फूट कर रोने लगी। सच्चाई सामने आ चुकी थी। उसकी जान बच गई थी ।
लेकिन उसका पति हमेशा के लिए चला गया था।

कुछ दिन बाद तन्वी फ्लैट छोड़ कर जा रही है। उसका एक हाथ उसके पेट पर है। वह प्रेग्नेंट थी। वह आखरी बार उस मिट्टी के दिए को देखते हैं। जो अब एक नई शांत लौ के साथ जल रहा था।
लेकिन तभी उसकी नजर दिए के पीछे की दीवार पर पड़ी। दिए की रोशनी से दीवार पर एक नई छाया बन रही थी। एक छोटे से बच्चों के हाथ की तरह.. जो धीरे-धीरे तन्वी की तरफ बढ़ रही थी।
तन्वी की आंखों में फिर से डर लौट आया।
क्या शाप वाक्य खत्म हुआ था? या फिर एक नई पीढ़ी में बस चुका है?

कभी-कभी सच्चाई जानकर भी आप उसे बदल नहीं सकते। आप बस उसके साथ जीना सिखाते हैं, या उसके भय में मर जाते हैं। सोचिए, अगर आपके घर में कोई पुराना दिया है… तो क्या वह सिर्फ रोशनी दे रहा है या कुछ और बता रहा है?

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