घर में गूंजती आवाज़

घर में गूंजती आवाज़
अधजली आत्मा की डरावनी कहानी

कहानी की शुरुआत

घर में गूंजती वो आवाज़। ये बात उन दिनों की है जब राहुल दसवीं में पढ़ता था। तब उसकी उम्र सोलह साल थी। उसके परिवार में उसके माता-पिता और एक छोटा भाई-बहन थे। उसके पिता रेलवे में सरकारी नौकरी करते थे, इसलिए उसे सरकारी क्वार्टर में रहना पड़ता था। अब उसके पिता का दिल्ली तबादला हो गया था और उन्होंने दिल्ली में एक फ्लैट ले लिया था।

राहुल बहुत खुश था क्योंकि उसे लग रहा था कि अब उसे अपना अलग कमरा मिल जाएगा। उसने अपना सारा सामान फ्लैट में शिफ्ट कर दिया था और वहीं रहने लगा था कुछ दिनों तक तो सब ठीक चलता रहा। लेकिन कुछ दिनों बाद उसे फ्लैट में अजीब सी बेचैनी होने लगी। राहुल को देर तक सोने की आदत थी।

वह रात में हॉरर फ़िल्में देखता था और हॉरर कहानियाँ पढ़ने-सुनने का शौक़ीन था। वह यूट्यूब (YouTube) पर नाइस नाइटमेयर (Nice Nightmares) की हॉरर कहानी सुना करता था। वह कमरे में अकेला रहता था। परिवार के बाकी लोग दूसरे कमरे में सोते थे।

हॉरर फ़िल्म

एक रात वह एक हॉरर फ़िल्म देख रहा था। अचानक उसको कमरे के बाहर से किसी की आवाज़ सुनाई दी। उसने सोचा कि शायद कोई पानी पीने उठा है। वह चुपचाप फ़िल्म देखने लगा।

लगभग तीन मिनट बाद, उसे फिर वही आवाज़ सुनाई दी। वो आवाज़ किसी औरत के चलने पर उसके पैरों की आहट जैसी थी। सरसराहट जैसी। बिल्कुल वैसी ही थी। आवाज़ सुनकर राहुल डर गया। उसने टीवी बंद किया और बाहर देखने चला गया।

जब वो कमरे से बाहर आया, तो वहाँ कोई नहीं था। कुछ देर देखने के बाद, वह वापस चला गया। उसे टीवी देखने में डर लग रहा था। थोड़ी देर बाद, वही आवाज़ उसके किचन से आने लगी। किचन उसके कमरे के बगल में था, इसलिए आवाज़ तेज़ थी।

इस बार, राहुल डर गया। उसने अपने माता-पिता को इसके बारे में बताने के बारे में सोचा। इस बार, उसने बिना देखे टीवी बंद करके सो जाने के बारे में सोचा।

तीन बजे

three o'clock

वह चुपचाप सो गया। अगली सुबह वह अपने दिन के काम में व्यस्त था। अब उसका ध्यान उस रात जो हुआ उस पर नहीं था। शाम हो चुकी थी। उसे बेचैनी होने लगी थी। उसने रात को खाना खाया और अपने कमरे में सोने चला गया। दिन भर के काम से वह थका हुआ था। आज उसने टीवी भी जल्दी बंद कर दिया था और सोने लगा था।

सुबह के लगभग तीन बज रहे थे। वो आवाज़ आने लगी। राहुल नींद से जाग गया। अब उसने बाहर देखना शुरू किया लेकिन आवाज़ रसोई से आ रही थी। वह रसोई में देखने गया। तभी ये आवाज़ ठीक उसके सामने से आ रही थी। इस बार आवाज़ तेज़ थी। लेकिन वहाँ कोई नहीं दिख रहा था। राहुल डर गया।

वह अपनी रसोई से कमरे की तरफ भागा और कमरे में रुक गया। आवाज़ उसके कमरे के पास से आ रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे कोई उसकी तरफ आ रहा है और वह और डर रहा था। आवाज़ तेज़ होती जा रही थी।

वह ज़ोर से चिल्लाया।

राहुल की चीख सुनकर उसके माता-पिता भागे चले आए। जब वे कमरे में आए, तो उन्होंने देखा कि राहुल ज़मीन पर बेहोश पड़ा है। उसके पिता ने राहुल को ज़मीन से उठाकर बिस्तर पर लिटा दिया। थोड़ी देर बाद राहुल को होश आया तो उसकी माँ ने उससे पूछा कि राहुल, क्या हुआ? तूने इतनी तेज़ आवाज क्यों लगाई और बेहोश कैसे हो गया? तब राहुल ने सारी सच्चाई बता दी। उसके पिता ने कहा कि तुझे ज़रूर कोई भ्रम हुआ होगा। यहाँ कोई भूत-प्रेत नहीं है। अब तू सो जा। सुबह बात करेंगे। राहुल चुपचाप सो गया।

अगली सुबह जब उठा तो उसने माँ और पिताजी को रात वाली बात बताई। यह सुनकर उसके पिता ने घर पर पूजा करवाने का सोचा। घर पर पूजा करने के बाद कुछ दिनों तक तो सब ठीक चलता रहा। राहुल का ध्यान अब भी इसी बात पर था। वह कौन थी और किसकी आवाज़ थी? वहाँ कोई दिख भी नहीं रहा था।

ज़िंदा जला दिया

Haunted Contents

राहुल अपने पिता के साथ उसके घर गया जिनसे उसने फ्लैट खरीदा था। पूछने पर राहुल को पता चला कि उनसे पहले उस फ्लैट में कोई और भी किराए पर रहता था। वहाँ दो लोग थे, एक आदमी और उसकी पत्नी, जो अक्सर झगड़ते रहते थे।

एक दिन उस आदमी ने अपनी पत्नी को ज़िंदा जला दिया। उस आदमी को जेल की सज़ा हुई और वह जेल चला गया। उसके बाद कई महीनों तक वह फ्लैट खाली रहा। और आस-पास के लोग कहते थे कि इस औरत का भूत यहाँ है और वह रात में चीखती है। और इस फ्लैट से ओरत की आवाज़ें भी आती हैं।

फिर कुछ महीनों बाद, जब माहौल थोड़ा शांत हुआ, तो मकान मालिक ने राहुल के पिता को फ्लैट भेज दिया। ऐसे ही बातें करते-करते उन्हें देर हो गई। राहुल और उसके पिता फ्लैट के लिए निकल पड़े और शाम को अपने फ्लैट पहुँच गए। लेकिन सब कुछ ठीक लग रहा था। फिर रात में फिर वही बेचैनी होने लगी।

खाना खाने के बाद वह कमरे में चला गया। उसके छोटे भाई-बहन दूसरे कमरे में खेल रहे थे। थोड़ी देर बाद, वे दोनों सो गए। अब रात हो चुकी थी। खिड़की से चाँद की रोशनी बिस्तर पर आ रही थी। राहुल भी गहरी नींद सो रहा था।

फिर सुबह के तीन बजे वही आवाज़ फिर से आने लगी। फिर राहुल की नींद उड़ गई। वह डर के मारे कमरे से बाहर आया और बोला। यहाँ कौन है? जो मुझे परेशान कर रहा है। तभी एक तेज़ आवाज़ आई। तुमने मुझे जला दिया। अब मैं तुम्हें नहीं छोड़ूँगी।

अंदर अँधेरा था

राहुल का दिल तेजी से धड़कने लगा। उसने डर के मारे चारों ओर देखा, लेकिन वहाँ कोई नहीं था। उसके गले से आवाज़ तक नहीं निकल रही थी। उसके पैरों के नीचे फर्श ठंडी बर्फ जैसा लग रहा था, और चारों ओर सन्नाटा पसरा हुआ था, बस खिड़की से आती हवा की सी-सी आवाज़ के अलावा।

अचानक, रसोई का दरवाज़ा अपने आप चर्र्र्र्र की आवाज़ के साथ खुला। अंदर अँधेरा था… लेकिन उस अंधेरे में लाल-सी झिलमिलाती दो आँखें उसे घूर रही थीं। राहुल चीखने ही वाला था कि उन आँखों के पीछे से एक परछाई धीरे-धीरे उसकी तरफ बढ़ने लगी।

उस परछाई का चेहरा जैसे अधजला था—गाल की हड्डियाँ बाहर, आधा चेहरा काला और फटा हुआ, और बाल राख जैसे उलझे हुए। उसने धीमी लेकिन खौफनाक आवाज़ में कहा—
“तुम सोचते हो कि पूजा से मैं चली जाऊँगी? यहाँ मेरा खून गिरा था… मेरी चीखें यहाँ कैद हैं… और अब तुम भी!”

राहुल काँपते हुए पीछे हटने लगा। तभी उसके माता-पिता का कमरा खुला और उसके पिताजी टॉर्च लेकर बाहर आए। टॉर्च की रोशनी जैसे ही उस परछाई पर पड़ी, वह पल भर में गायब हो गई… लेकिन हवा में जलते मांस की गंध भर गई।

अगली सुबह

सुबह होते ही राहुल ने अपनी माँ और पिताजी को सारी घटना बताई। पिताजी अब भी इसे “भ्रम” कहकर टाल रहे थे, लेकिन राहुल के डर को देखकर उन्होंने नज़दीकी एक पंडित को बुलाया। पंडित ने पूरे फ्लैट में घूमकर देखा और फिर गंभीर स्वर में कहा—
“ये जगह शुद्ध नहीं है। यहाँ किसी की मौत बहुत पीड़ा में हुई है। आत्मा ने अभी भी मुक्ति नहीं पाई है।”

पंडित ने शाम को हवन करने की बात कही। शाम को जब मंत्रोच्चार शुरू हुआ, तभी रसोई के दरवाज़े के पास रखे पानी के गिलास में बुलबुले उठने लगे, जैसे पानी उबल रहा हो, जबकि गैस बंद थी। पंडित मंत्र पढ़ते-पढ़ते रुक गए और बोले—
“ये आत्मा यहाँ से जाने को तैयार नहीं है… इसका बदला अधूरा है।”

अतीत का रहस्य

राहुल के पिता ने पुराने अख़बारों में उस औरत की मौत की खबर ढूँढी। खबर में लिखा था कि पति ने झगड़े के बाद पत्नी को मिट्टी का तेल डालकर जला दिया था… लेकिन गवाहों का कहना था कि पत्नी जलते हुए चिल्ला रही थी—
“मैं वापस आऊँगी… सबको खत्म कर दूँगी!”

सबसे डरावनी बात ये थी कि अखबार में जिस औरत का नाम था, उसका नाम राहुल की माँ के नाम से मिलता-जुलता था।

हवन के बाद कुछ दिन शांति रही, लेकिन फिर वही बेचैनी लौट आई।
एक रात राहुल सो रहा था, जब उसने सपने में देखा कि वही औरत उसके बिस्तर के पास खड़ी है, और उसके कान में फुसफुसा रही है—
“तुम्हारे घर में मेरी जगह किसी और ने ले ली है… अब उसे जाना होगा।”

राहुल नींद से जागा तो पाया कि उसकी माँ का कमरा बंद है और अंदर से चीखने की आवाज़ आ रही है। वह दौड़कर दरवाज़ा तोड़ने लगा, लेकिन दरवाज़ा जैसे किसी ने अंदर से जकड़ रखा हो। अचानक दरवाज़ा खुला और उसकी माँ फर्श पर बेहोश पड़ी मिलीं, माथे पर जलने का ताज़ा निशान था… जैसे किसी ने जलती हुई उँगलियों से छुआ हो।

डरावना अंत

घर की भूतिया आवाज़

डर के मारे अगले ही दिन परिवार ने फ्लैट खाली कर दिया। लेकिन राहुल को चैन नहीं मिला… दिल्ली छोड़ने के बाद भी, हर रात उसे सपने में वही जलता चेहरा दिखने लगा।

एक दिन उसने पुराने पड़ोस के एक आदमी से फोन पर बात की। उस आदमी ने ठंडी आवाज़ में कहा—
“अरे, तुम्हारे जाने के बाद भी उस फ्लैट में हर रात किसी के चलने की आवाज़ आती है… और खिड़की में कोई जलता चेहरा दिखता है। लेकिन सबसे अजीब बात… जब तुम लोग गए, उस रात हमने तुम्हारे फ्लैट की बालकनी में तुम्हारी ही शक्ल का एक लड़का खड़ा देखा था, जो नीचे हमें घूर रहा था।”

राहुल के हाथ से फोन गिर गया।
उसने शीशे में अपना चेहरा देखा… और एक पल के लिए उसे लगा कि उसका आधा चेहरा जला हुआ है।

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